नेत्र दोष के तीन प्रकार क्या हैं?HealthPlanet

Posted on Thu 15th Dec 2022 : 10:37

कुछ विशेष परिस्थितियों में नेत्र धीरे-धीरे अपनी समंजन क्षमता खो देते हैं, नेत्र में अपवर्तन संबंधी विकार होने से दृष्टिदोष उत्पन्न होते हैं। मुख्य रूप से तीन दृष्टिदोष होते हैं- (1) निकट दृष्टिदोष, (2) दूर दृष्टिदोष, (3) जरा-दृष्टिदोष.

निकट दृष्टि दोष क्या है

जब कोई व्यक्ति पास में रखी वस्तु को तो स्पष्टता से देख लेता है, किंतु दूर रखी वस्तु को आसानी से नहीं देख पाता है तब उसे निकट दृष्टि दोष है कहते हैं.

निकट दृष्ट दोष का कारण तथा उपाय

अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी कम हो जाती है या नेत्र का गोलक लंबा हो जाता है। ऐसे दोष से प्रभावित व्यक्ति के नेत्र में दूर स्थित वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर न बनकर रेटिना के पहले बनता है। उचित क्षमता वाले अवतल लेंस को प्रयुक्त कर इस दोष का निवारण किया जा सकता है।

दूर दृष्टिदोष क्या है

इस दोष से प्रभावित व्यक्ति, दूर रखी वस्तुओं को तो आसानी से देख सकता है, परंतु पास रखी वस्तु को स्पष्टता से नहीं देख पाता है।

दूर दृष्टिदोष का कारण तथा उपाय

अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी का बहुत अधिक बढ़ जाना या नेत्र के गोलक के छोटे हो जाने के वजह से यह दोष होता है. इस दोष से प्रभावित व्यक्ति के नेत्र के पास में रखी वस्तु का प्रतिबिंब नेत्र की रेटिना पर न बनकर रेटिना के पीछे बनता है। उपयुक्त क्षमता वाले उत्तल लेंस को उपयोग में लाकर इस दोष का निवारण किया जा सकता है।

जरा दृष्टि दोष क्या है

वृद्धावस्था में आँख की समंजन क्षमता में कमी अथवा समाप्त होने से व्यक्ति न तो दूर की वस्तु स्पष्टता से देख पाता है और न ही पास की तब इस बिमारी को जरा दृष्टि दोष कहते हैं. उचित क्षमता वाले द्विफोकल लेंस की सहायता से इस समस्या का निवारण किया जा सकता है।

अबिंदुकता (Astigmatism)

इस दृष्टिदोष का कारण आँख के गोलक की असममित वक्रता है जिसके कारण मुख्य प्रतिबिंब के अतिरिक्त एक अन्य धुंधला प्रतिबिंब बनता है। वर्णांधता (Colour Blindness) एक आनुवंशिक रोग है, जिसमें व्यक्ति लाल तथा हरे रंग में विभेद नहीं कर पाता है। इसे किसी लेंस के प्रयोग से सही नहीं किया जा सकता है।

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